मध्यप्रदेश

‘अनुकंपा नियुक्ति’ के कर्मचारियों प्रति शासन का रवैया लचीला क्यों नहीं, कहां गई दया,कृपा, सहानुभूतियां ?

कंप्यूटर दक्षता परीक्षा की अनिवार्यता पर शासन के कर्मचारियों में रोष

‘अनुकंपा नियुक्ति’ के कर्मचारियों  प्रति शासन का रवैया लचीला क्यों नहीं, कहां गई दया,कृपा, सहानुभूतियां ?

भोपाल, 29 मई 2025
एमपी मीडिया पॉइंट

मप्र सामान्य प्रशासन विभाग ने गत 26 मई 2026 को एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि, प्रदेश के सभी विभागों में कार्यरत एलडीसी (निम्नश्रेणी लिपिक/बाबूओं के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सीपीसीटी (कंप्यूटर दक्षता) परीक्षा में छूट के लिए कोई प्रावधान नहीं दिया जाता। ना ही कोई निर्देश जारी किए गए हैं। पुराने आदेशों की त्रुटिपूर्ण व्याख्या की गई है। इसलिए 40 वर्ष उपरांत भी दोनों आहर्ता परीक्षा कंप्यूटर दक्षता एवं हिंदी मुद्रण आवश्यक है।

अब सवाल यह उठता है कि सरकार की निगाह में ‘शासकीय नियुक्ति’ और ‘अनुकंपा नियुक्ति’ में क्या कोई अंतर नहीं है? नियुक्ति के दोनों आधार पर शासन का एक जैसा प्रहार (व्यवहार) कहां तक उचित है?

खुद शासन के आला अफसरान ‘अनुकंपा नियुक्ति’ की त्रुटिपूर्ण व्याख्या करते नज़र आ रहे हैं! तभी तो एक ही पिरानी से सभी को घेर रहे हैं।

जानकारी के लिए बताते चलें कि अनुकम्पा का मूल अर्थ दया, कृपा, सहानुभूति या अनुग्रह है। यह वह मनोवेग है जो किसी अन्य व्यक्ति के दुःख या पीड़ा को देखकर उत्पन्न होता है और उस पीड़ा को दूर करने की इच्छा जगाता है। यह शब्द अक्सर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग संदर्भों में इस्तेमाल किया जाता है। अनुकम्पा नियुक्ति सरकारी या कॉर्पोरेट क्षेत्रों में, यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार को तत्काल आर्थिक संबल देने के लिए परिवार के किसी आश्रित सदस्य को बिना सामान्य भर्ती प्रक्रिया के नौकरी दी जाती है। इसे ही ‘अनुकम्पा नियुक्ति’ कहा जाता है। लेकिन इस श्रेणी के कर्मचारियों को शासन दया की दृष्टि से देखने के बजाए अब नियमों की जंजीर में जकड़ रहा है। यह भी सर्वविदित है कि अनुकंपा कर्मचारियों को वेतनवृद्दि/अन्य सुविधाएं शासन ‘सूई’ के नाके में से निकाल कर देता है। ऐसे में शासन को अपने बनाए नियमों में मानवीय दृष्टिकोण का भी समावेश करना होगा।

वर्तमान में कंप्यूटर दक्षता/हिंदी टाइपिंग परीक्षा की अनिवार्यता के नियम को विलुप्त किए जाने की मांग मप्र के कई जिलों से उठ रही है। मांग के साथ नियम के प्रति बाबूओं में ‘रोष’ भी दृष्टिगोचर हो रहा है। जो आगे चलकर प्रदेशव्यापी धरना/प्रदर्शन में तब्दील हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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