भोपालसीहोर जिला

शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगाम, शराब दुकानों पर क्यूआर कोड का डिजिटल पहरा

शराब दुकानों पर आबकारी विभाग के क्यूआर कोड का पहरा

शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगाम

शराब दुकानों पर क्यूआर कोड का डिजिटल पहरा,
10 दिन तक आबकारी विभाग का विशेष सर्च ऑपरेशन,
क्यूआर कोड चस्पा न करने वाले लायसेंसियों पर गिरेगी गाज

सीहोर, 28 अप्रैल, 2026
एमपी मीडिया पॉइंट

प्रदेश की मदिरा दुकानों पर हो रही मनमानी वसूली और नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए अब तकनीक और सख्ती करने का निर्णय लिया है। विभाग के संज्ञान में आया है कि कई जिलों में शराब की दुकानों पर न केवल अधिकतम विक्रय मूल्य एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं, बल्कि प्रतिस्पर्धा के चलते न्यूनतम विक्रय मूल्य एमएसपी से कम पर भी मदिरा बेची जा रही है। इस गंभीर अनियमितता को विभागीय निर्देशों की खुली अवहेलना मानते हुए आबकारी आयुक्त श्री दीपक सक्सेना ने अब हर मदिरा दुकान पर ‘क्यूआर कोड’ चस्पा करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगी, जिससे वे मौके पर ही अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर ब्रांड की वास्तविक और कानूनी दरों का सत्यापन कर सकेंगे।

अब हर मदिरा दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल द्वारा जनरेटेड क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य है। इसे स्कैन करते ही उपभोक्ता के मोबाइल पर संबंधित जिले की रेट लिस्ट खुल जाएगी। कोई दुकान संचालक यदि निर्धारित एमएसपी से कम या एमआरपी से ज्यादा पर बिक्री करता है, तो मध्यप्रदेश राजपत्र की कंडिका 21.2 एवं 21.3 के तहत उसके विरुद्ध लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। उपभोक्ता अब सीधे मौके पर ही रेट का मिलान कर सकेंगे।

यह कदम उपभोक्ताओं को पारदर्शी सेवाएं देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से जिला अधिकारियों को विशेष क्यूआर कोड उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें दुकानों के प्रमुख हिस्सों पर लगाना होगा। कोई लायसेंसी यदि इन नियमों की अनदेखी करता है या निर्धारित दरों से अलग बिक्री करता पाया जाता है, तो उसे भारी दंड का सामना करना पड़ेगा। मदिरा उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उत्पाद उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी पारदर्शिता को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश भर में 28 अप्रैल 2026 से 7 मई 2026 तक एक विशेष 10 दिवसीय जांच अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट 11 मई तक अनिवार्य रूप से तलब की गई है।

मदिरा दुकानों पर विक्रय मूल्यों के सत्यापन हेतु चस्पा किये जाने वाले क्यूआर कोड सम्बन्धी निर्देश

1. क्यूआर कोड को ए-3 आकार के स्टिकर पेपर पर प्रिंट कराया जाये।

2. पेपर न्यूनतम 250 जीएसएम की गुणवत्ता का होना चाहिए।

3. स्टिकर में ग्लू पर्याप्त गुणवत्ता/मात्रा का होना चाहिए, जिससे इसे एक बार चस्पा होने पर निकाला न जा सके।

4. प्रत्येक मदिरा दुकान हेतु 5 क्यूआर कोड प्रिंट कराये जाएं :-

I. 3 क्यूआर कोड को अभी मदिरा दुकान के ऐसे स्थानों पर चस्पा कराये जाएँ जहाँ से अधिकतम उपभोक्ताओं द्वारा इन्हें आसानी से स्कैन किया जा सके।

II. शेष 2 क्यूआर कोड को भविष्य में आवश्यकता हेतु सुरक्षित रखा जाए, जिन्हें पूर्व में चस्पा क्यूआर कोड फटने अथवा क्षतिग्रस्त होने पर पुनः चस्पा कराया जाए।

5. क्यूआर कोड विभाग द्वारा प्रिंट कराये जाकर मदिरा दुकानों पर चस्पा कराये जाएँ, जिसका स्टेशनरी हेतु निर्धारित कोषालय शीर्ष से भुगतान किया जाये।

6. सम्बंधित वृत्त प्रभारी द्वारा मदिरा दुकान के क्यूआर कोड को स्कैन किया जाकर यह परिक्षण कर लिया जाए कि इसके माध्यम से मदिरा के विक्रय मूल्य (एमएसपी एवं एमआरपी) की जानकारी प्रदर्शित हो रही है।

7. क्यूआर कोड चस्पा होने पर, सम्बंधित वृत प्रभारी से मदिरा दुकान की फोटो प्राप्त की जाए जिसमे क्यूआर कोड प्रदर्शित हों। समस्त दुकानों पर उक्त कार्यवाही होने पर कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र इस कार्यालय को प्रेषित किया जाए।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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