एमपी के ‘कोसमी’ अतिक्रमण मामले को लेकर शिवराज सिंह चौहान के बयान से क्षुब्ध वनकर्मियों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
कहा- बताएं केंद्रीय मंत्री कि "नर पिशाच" कहने के पीछे तात्पर्य क्या है ?

हाईलाइट्स
एमपी के ‘कोसमी’ बीट से हटाए अतिक्रमण की आग सियासत में ही नहीं, शासन के वन विभाग संगठनों में भी सुलग रही है। ताजा मामलें में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान या तो स्पष्ट करें कि नर पिशाच कौन ? या फिर करें क्षमा याचना..
कोसमी कांड के बाद केंद्रीय मंत्री के बयान से नाराज वन कर्मियों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
- सीहोर/एमपी , 28 अक्टूबर 2026
एमपी मीडिया पॉइंट
मध्यप्रदेश के जिला सीहोर स्थित कोसमी बीट में वन विकास निगम के द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के उपरांत केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा उपयोग किए गए ‘नरपिशाच’ शब्द के संबंध में स्पष्टीकरण देने और भविष्य में अतिक्रमण हटाने के लिए वन विकास निगम को पर्याप्त प्रशासनिक एवं पुलिस बल उपलब्ध कराने तथा अवैध अतिक्रमण के मामलों में राजनीतिक दबाबों से मुक्त निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग को लेकर मंगलवार को मध्यप्रदेश वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ से जुड़े सैकड़ों वन कर्मियों द्वारा कलेक्टोरेट पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम का ज्ञापन संघ जिला अध्यक्ष श्याम सुंदर सिंह राजपूत के नेतृत्व में सक्षम प्रशासनिक अधिकारी तहसीलदार डॉ अमित सिंह को सौंपा गया।
मध्यप्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ के पदाधिकारियो ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शासन के वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए वन एवं वनभूमि की सुरक्षा तथा अवैध अतिक्रमण की रोकथाम के लिए कार्य करते हैं। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को टारगेट का अपमानित किया जाता है।
संघ शासन से मांग करता है कि केंद्रीय मंत्री के द्वारा कोसमी घटनाक्रम के बाद सार्वजनिक रूप से उपयोग किए गए नरपिशाच” शब्द के संदर्भ में उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाए या फिर केंद्रीय मंत्री इस शब्द को वापस लेकर सार्वजनिक से खेद व्यक्त कर क्षमा याचना करें।
“नरपिशाच” शब्द के संबंध में स्पष्ट किया जाए कि उक्त शब्द किस संदर्भ में एवं किन व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया गया है ताकि वन कर्मचारियों के मध्य असमंजस की स्थिति स्पष्ट हो जाए।
यदि उक्त शब्द वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए प्रयक्त किया गया तो मध्यप्रदेश वनकर्मचारी संघ जिला शाखा सीहोर इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज करता है। शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों के संदर्भ में इस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है तथा इससे कर्मचारियों के सम्मान एवं मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वनभूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विरोध, दबाव तथा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में पर्याप्त सुरक्षा एवं प्रशासनिक सहयोग के अभाव में निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका रहती है।
भविष्य में वनभूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त पुलिस बल एवं प्रशासनिक बत उपलब्ध कराया जाए। संबंधित जिला प्रशासन पलिस प्रशासन एवं वन विभाग के बीच समचित समन्वय स्थापित किया जाए ताकि कार्रवाई कानून के अनुरूप निष्पक्ष एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो सके और वन अधिकारी एवं कर्मचारी बिना किसी अनुचित दबाव या भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करने के उद्देश्य से अवैध अतिक्रमणकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों को भ्रमित किए जाने की निष्पक्ष जांच की जाए।प्रदर्शन में जिला उपाध्यक्ष अशोक सिंह चौहान जिला सचिव दीपक बेदी, संजय सक्सेना सहित बड़ी संख्या में वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी सम्मिलित रहे।



