‘मोक्षदायिनी नर्मदा पर संकट’: फैक्ट्रियों का गंदा पानी, अधूरा पथ मन को व्यथित करता है। — विक्रम मस्ताल शर्मा
मां नर्मदा परिक्रमा के पश्चात वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बहुत कुछ गिनाई खामियां, पत्रकारों से हुए रुबरु

‘मोक्षदायिनी नर्मदा पर संकट’: फैक्ट्रियों का गंदा पानी, अधूरा पथ मन को व्यथित करता है।
— विक्रम मस्ताल शर्मा
बुधनी से चुनाव लड़ चुके विक्रम मस्ताल उर्फ हनुमान बोले—“नर्मदा को छलनी किया जा रहा”; व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल
सीहोर, 24 मार्च 2025
एमपी मीडिया पॉइंट
माँ नर्मदा की पावन परिक्रमा पूर्ण कर लौटे विक्रम मस्ताल शर्मा ने मंगलवार को शहर के होटल वृंदावन में आयोजित पत्रकार वार्ता में नर्मदा नदी की वर्तमान स्थिति पर गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर फैक्ट्रियों का गंदा पानी सीधे नर्मदा में मिल रहा है, जिससे नदी की पवित्रता और पर्यावरण दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि परिक्रमा के दौरान जो स्थिति देखने को मिली, वह बेहद चिंताजनक है और इससे श्रद्धालुओं की आस्था आहत हो रही है।
मोक्षदायिनी नर्मदा: आस्था की सबसे कठिन यात्राओं में एक
विक्रम मस्ताल ने बताया कि नर्मदा परिक्रमा सनातन धर्म की सबसे कठिन और पवित्र यात्राओं में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि माँ नर्मदा की परिक्रमा करने से जीवन के पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
यह परिक्रमा हजारों किलोमीटर लंबी होती है, जिसे श्रद्धालु महीनों तक कठिन परिस्थितियों में नियम, संयम और पूर्ण आस्था के साथ पैदल पूरा करते हैं।
“जमीनी हकीकत अलग—कई जगह नहीं बना नर्मदा पथ”
उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग पर कई स्थानों पर अब तक नर्मदा पथ का निर्माण नहीं हो पाया है। कहीं रास्ता अधूरा है तो कहीं मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
परिक्रमा वासियों को कई बार जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती है, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि इतनी महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा के बावजूद व्यवस्थाओं में कमी क्यों बनी हुई है।
“नर्मदा को छलनी किया जा रहा, परिक्रमा वासियों में रोष”
विक्रम मस्ताल ने कहा कि नर्मदा नदी के साथ हो रही लापरवाही को लेकर परिक्रमा वासियों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न माध्यमों से नदी को “छलनी” किया जा रहा है, जो अत्यंत पीड़ादायक है।
उन्होंने कहा कि एक ओर श्रद्धालु इसे माँ मानकर उसकी पूजा करते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी नदी को प्रदूषित किया जाना बेहद विरोधाभासी स्थिति है।
आस्था बनाम व्यवस्था: उठे बड़े सवाल
पत्रकार वार्ता के दौरान यह मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया कि जब नर्मदा परिक्रमा जैसी आस्था को इतना महत्व दिया जाता है, तो उसके मार्ग, सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर ठोस व्यवस्था क्यों नहीं है।
यह भी सवाल उठा कि क्या आस्था केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित रह गई है या फिर व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की भी जरूरत है।
संरक्षण और सुधार के लिए अपील
विक्रम मस्ताल ने प्रशासन और समाज दोनों से अपील की कि नर्मदा के संरक्षण, स्वच्छता और परिक्रमा मार्ग को व्यवस्थित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
“आस्था को बचाने के लिए व्यवस्था सुधार जरूरी”
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नर्मदा की स्थिति और परिक्रमा मार्ग की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो यह केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।



