मध्यप्रदेश

श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त किए जाने की मांग

जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा का बयान

श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त किए जाने की मांग,
कांग्रेस नेता पंकज शर्मा ने लगाया फर्जी डिग्रियां बांटने तथा जमीनों में गड़बड़ी करने का आरोप

सीहोर, 27 अगस्त 2026
एमपी मीडिया पॉइंट

जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा ने एक बयान जारी कर सीहोर स्थित श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले दिनों इस विश्वविद्यालय के कुलपति सहित तीन लोगों को राजस्थान पुलिस ने फर्जी डिग्रियां बांटने के मामले में गिरफ्तार किया था, तो वहीं यहां का एक पूर्व छात्र भी नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार हुआ था। .                                पंकज शर्मा ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर फर्जी तरीके से पुरानी तारीख में डिग्रियां बांटने, परीक्षाओं में नकल करवाकर और पैसे लेकर विद्यार्थियों को पास कराने तथा ऐसा करके देश की शिक्षा प्रणाली को कमजोर करके छात्रों के बौद्धिक स्तर को पंगु बनाने और उनका भविष्य बर्बाद करने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर धोखाधड़ी कर आसपास के किसानों की जमीन हड़पने का भी आरोप लगाया है। श्री शर्मा ने राज्य सरकार और सीहोर जिला प्रशासन से इन सभी मामलों सहित इसके द्वारा अब तक सभी विद्यार्थियों को दी गई डिग्रियों की गहनता से जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा इस विश्वविद्यालय की मान्यता तत्काल समाप्त करने की मांग की है।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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