मध्यप्रदेश

ऑनलाइन अटेंडेंस पोर्टल की तकनीकी खामी से शिक्षक परेशान, स्कूल में उपस्थित रहने के बावजूद वेतन कटने का खतरा

गुरुवार को परेशान रहे अनेकों शिक्षक

ऑनलाइन अटेंडेंस पोर्टल की तकनीकी खामी से शिक्षक परेशान, स्कूल में उपस्थित रहने के बावजूद वेतन कटने का खतरा

अतिथि शिक्षकों के लिए वैकल्पिक उपस्थिति व्यवस्था लागू करने की मांग, प्रधानाध्यापक को दिया जाए उपस्थिति प्रमाणित कर वेतन बनाने का अधिकार

सीहोर/लाड़कुई, 05 नवंबर 2026.                                     एमपी मीडिया पॉइंट

गुरुवार 5 नवंबर 2026 को प्रदेश के अनेक शासकीय विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों एवं नियमित शिक्षकों को ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचे और अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहे, लेकिन शिक्षा विभाग के ऑनलाइन अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी।

कहीं पोर्टल पर अपग्रेडेशन एवं गेटवे की समस्या दिखाई दी तो कहीं नेटवर्क एरर के कारण शिक्षक बार-बार प्रयास करने के बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाए। सवाल यह है कि जब शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंच चुका है और अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, तो विभागीय पोर्टल की तकनीकी खामी की सजा शिक्षक को क्यों मिले?

सबसे गंभीर स्थिति अतिथि शिक्षकों की है। नियमित शिक्षकों के लिए उपस्थिति दर्ज नहीं होने की स्थिति में विद्यालय में उपस्थित होने का फोटो अपलोड करने जैसे वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन अतिथि शिक्षकों के पास ऐसा कोई प्रभावी विकल्प नहीं है। ऐसे में पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है और उनका एक दिन का वेतन कटने का खतरा बना हुआ है।

सरकार के सामने व्यावहारिक समाधान और मांग

सरकार एवं स्कूल शिक्षा विभाग से मांग है कि ऐसी तकनीकी समस्याओं के निराकरण के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए।

1. जिस दिन अतिथि शिक्षक विद्यालय में उपस्थित हों, लेकिन पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न हो पाए, उस दिन प्रधानाध्यापक से उनकी उपस्थिति का प्रमाणित आवेदन लिया जाए।

2. प्रधानाध्यापक द्वारा प्रमाणित किया जाए कि संबंधित अतिथि शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय में उपस्थित था और उसने अपनी ड्यूटी निभाई है। इस प्रमाण के आधार पर उसकी उपस्थिति मान्य कर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

3. यदि संभव हो तो प्रधानाध्यापक की लॉगिन आईडी में ऐसा अतिरिक्त विकल्प दिया जाए, जिसके माध्यम से वे पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाए अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति को प्रमाणित कर सकें और उनके वेतन संबंधी कार्य को पूरा कर सकें।

4. अतिथि शिक्षकों के वेतन बनाने की प्रक्रिया में भी प्रधानाध्यापक को आवश्यक अधिकार दिए जाएं, ताकि वास्तविक उपस्थिति के आधार पर उनका वेतन तैयार हो सके और तकनीकी समस्या के कारण भुगतान न रुके।

5. ऑनलाइन अटेंडेंस पोर्टल का अपग्रेडेशन एवं तकनीकी मेंटेनेंस विद्यालयों की छुट्टियों के दिनों में कराया जाए, ताकि स्कूल संचालन के समय शिक्षकों को परेशानी न हो।

आखिर शिक्षक की गलती क्या है?

शिक्षक स्कूल समय पर पहुंचा, अपनी ड्यूटी निभाने के लिए मौजूद रहा, लेकिन विभाग का सर्वर और पोर्टल काम नहीं कर रहा। ऐसी स्थिति में तकनीकी व्यवस्था की विफलता का आर्थिक दंड शिक्षक को देना कहां तक उचित है?

विशेषकर अतिथि शिक्षक पहले से ही सीमित मानदेय और रोजगार की अनिश्चितता के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे में बिना किसी गलती के एक दिन का वेतन कटना उनके साथ अन्याय होगा।

सरकार से आग्रह है कि 5 नवंबर को तकनीकी कारणों से जिन शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई है, उनकी वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन प्रधानाध्यापक से करवाकर उस दिन का वेतन सुरक्षित किया जाए।

तकनीक शिक्षकों की सुविधा के लिए होनी चाहिए, परेशानी और वेतन कटौती का कारण नहीं। विभाग ऐसी व्यवस्था बनाए जिसमें शिक्षक की वास्तविक उपस्थिति को महत्व मिले, न कि केवल पोर्टल पर दर्ज हुई उपस्थिति को।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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