मध्यप्रदेश

किस्सा डीपीसी की कुर्सी का : मप्र के सीहोर जिला शिक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी, 3 वर्ष से प्रभारी के जिम्मे डीपीसी की कुर्सी,

मेरिट लिस्ट और तबादला आदेशों के बाद भी नहीं बदली सीहोर की शक्ल

हाइटाइट्स

जिला शिक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी, 3 वर्ष से प्रभारी के जिम्मे डीपीसी की कुर्सी
– मेरिट लिस्ट और तबादला आदेशों के बाद भी नहीं बदला सीहोर का समीकरण, ठाठ से जमे अधिकारी…और आफिस के अंदर अटेचमेंट के ‘मैजिक’

सीहोर, 11 मई 2026,                                                एमपी मीडिया पॉइंट

जिले के शिक्षा विभाग में इन दिनों अंधेर नगरी, चौपट राजा वाला हाल है। एक तरफ सरकार पारदर्शिता और शिक्षा में सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में नियमों को ताक पर रखकर कुर्सी का खेल चल रहा है। मामला जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) के पद का है, जहां पिछले 3 सालों से एक प्रभारी अधिकारी नियमों के विरुद्ध जमे हुए हैं।

इस आदेश का सीहोर में क्या हुआ ?

बता दें कि राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल ने करीब 8 वर्ष पहले स्पष्ट आदेश (नंबर 5957) जारी किया था। इस आदेश में अनिवार्य रूप से उल्लेख था कि यदि किसी जिले में डीपीसी का पद खाली होता है तो उसका प्रभार अनिवार्य रूप से जिला शिक्षा अधिकारी को दिया जाए। शासन ने उन जिलों पर नाराजगी भी जताई थी जहां कनिष्ठ अधिकारियों को यह प्रभार सौंपा गया था। लेकिन राजधानी से सटा जिला मुख्यालय सीहोर उस किस्से का वो अफसाना बन कर रह गया है जिसमें शासन के नियम अधिकारियों की जेब में रखे मिलते हैं।

मेरिट लिस्ट और आदेश भी बेअसर  आला अधिकारी बेख़र

सीहोर : यहां मिलती ‘चुनिन्दाओं को चुनौती..

हैरानी की बात यह है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने 06 मई 2026 को एक नया आदेश क्रमांक 933/503235 जारी किया है, जिसमें लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की मेरिट लिस्ट के आधार पर प्रदेश के कई जिलों जैसे (मण्डला, डिण्डौरी, बैतूल, रतलाम) आदि में नए जिला परियोजना समन्वयकों की नियुक्ति कर दी गई है। राज्य शिक्षा केंद्र ने 21 सितंबर 2025 को बाकायदा परीक्षा आयोजित कर 36 उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट भी जारी की थी। लेकिन सीहोर में अब भी आरआर उइके, जो कि मूलत: एक प्राचार्य की पोस्ट पर होना चाहिए था, पिछले 3 साल से डीपीसी की महत्वपूर्ण कुर्सी पर काबिज हैं। यह सब बात शासन के आला अधिकारियों क्या पता नहीं, या फिर वे जानबूझकर बेख़र बन रहे हैं।

विभाग में मनमानी, शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे

जब विभाग का मुखिया ही नियम के विरुद्ध बैठा हो तो प्रशासनिक पकड़ ढीली होना स्वाभाविक है। सूत्रों के अनुसार सीहोर के ब्लॉक और ग्रामीण स्कूलों में अफरा तफरी मची है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान डीपीसी पद पर प्राचार्य काबिज हैं, जिसका फायदा उठाकर दफ्तर के बाबू और अन्य कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और शिक्षा का अधिकार जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।

– अटेचमेंट का मैजिक

कार्यालयीन कार्यों के लिए ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को स्कूलों से अटेच कर रखा है। जानकारी अनुसार एक शिक्षक इछावर तो दूसरा शिक्षक ग्राम खंडवा से जिला शिक्षा केंद्र में अटेच है। यह क्यों अटेच है ? इस सवाल का जवब देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसके कारण को तो कोई अनपढ़ भी आसानी से समझ सकता है…यहां भ्रष्टाचार की ‘बू’ को सूंघने के लिए कोई ‘वंडर डॉग’ की आवश्यकता नहीं,
सब किस्सा कुर्सी का है!

-दबी जुबान में उठ रहे सवाल

विभाग के ही कर्मचारी/शिक्षक नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि जिला एवं ब्लॉक में बैठे अधिकारियों को अब स्कूलों की जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं रह गया है। शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

Related Articles

Back to top button