सीहोर जिला

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह बोले- मैं नेता-मंत्री नहीं, बेटियों का मामा बनकर आया हूँ, मामा की दुआएं लेती जा, तुझको सुखी संसार मिले

शिवराज सिंह रहे अपने अंदाज में...

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह बोले- मैं नेता-मंत्री नहीं, बेटियों का मामा बनकर आया हूँ,
मामा की दुआएं लेती जा, तुझको सुखी संसार मिले

मामा हमेशा बेटियों के साथ- जब भी जरूरत पड़ेगी, सेवा के लिए हाजिर रहूंगा

मामा के होते हुए बेटियों की शादी, शुल्क लेकर क्यों हो..?
हर बेटी को 11-11 हजार की सप्रेम भेंट

सीहोर, 30 अप्रैल, 2026
एमपी मीडिया पॉइंट

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के दौरे पर रहे। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री सबसे पहले बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिपलानी पहुंचे, जहां आदर्श गोंड समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल होकर नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, सामूहिक विवाह में शामिल हर बेटी को “मामा” की ओर से 11-11 हजार रुपये की सप्रेम भेंट दी जाएगी। दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विकास कार्यों को भी गति देते हुए ग्राम सुकरवास, वासुदेव, जमुनिया और सातदेव में करीब 40 करोड़ रुपये की लागत के अलग-अलग विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि, क्षेत्र के समग्र विकास और सामाजिक कल्याण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।

बेटियों को जीवन की हर खुशी मिले

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सामूहिक विवाह सम्मेलन में भावुक होते हुए बेटियों से कहा कि, मैं यहाँ कोई मंत्री या नेता बनकर नहीं आया हूँ, बल्कि अपनी बेटियों के मामा के रूप में आया हूँ, इन्हें आशीर्वाद देने आया हूं। भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि ये हमेशा सुखी रहें, वर-वधु दोनों निरोग रहें, इनका मंगल हो, इनका कल्याण हो। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि, भगवान ऐसी कृपा करना कि मेरी बेटियों के पांव में कांटा भी न गड़े और इन्हें जीवन की हर खुशी मिले। नवदंपतियों को जीवन के मूल्यों का संदेश देते हुए उन्होंने कहा, आपस में मिल-जुलकर प्रेम से रहना, क्योंकि यह जीवनभर का साथ है। दोनों परिवारों का मान-सम्मान बढ़ाना और जितना संभव हो, दूसरों की सेवा करना। समाज की सेवा को सर्वोच्च बताते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि, सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मैं दिल से मानता हूँ कि जनता की सेवा ही भगवान की सच्ची पूजा है, इससे बड़ी कोई पूजा नहीं।

मामा के होते हुए बेटियों का विवाह, शुल्क लेकर क्यों हो..?

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, मैं अपनी बेटियों के लिए सिलाई मशीन भी लेकर आया हूं, ताकि हर एक के पास रोजगार का एक साधन हो। वो घर से ही सिलाई का काम कर सकें और जरूरत पड़े तो इसे सीखकर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी आयोजकों ने शानदार व्यवस्था की है। इसी दौरान उन्होंने बड़ा निर्णय लेते हुए कहा, मामा का दिल कह रहा है कि, जब मैं हूं तो बेटियों पर कोई बोझ क्यों पड़े। इसलिए जो ग्यारह-ग्यारह हजार रुपये शुल्क के रूप में लिए गए हैं, वह राशि मैं सप्रेम भेंट के रूप में बेटियों को वापस करूंगा। उनके घर तक यह राशि पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि, जब मामा जिंदा है तो बेटियों का विवाह, शुल्क लेकर क्यों हो? शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम के आयोजकों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि, परंपरा को बनाए रखते हुए इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करना सराहनीय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले वर्ष भी यह आयोजन और भव्य रूप से किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि, मामा हमेशा अपनी बेटियों के साथ खड़ा है। जब भी जरूरत पड़ेगी, मैं सेवा के लिए हाजिर रहूंगा। मेरी दुआ है कि मेरी सभी बेटियां हमेशा खुश रहें और उनका जीवन सुख-समृद्धि से भरा रहे।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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