क्राइम रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल : सुवेंदु अधिकारी के निज सचिव की सरेआम हत्या

पश्चिम बंगाल की राजनिति में हिंसा के साथ हत्या का प्रवेश

पश्चिम बंगाल : सुवेंदु अधिकारी के निज सचिव की सरेआम हत्या

मीडिया रिपोर्ट, 06 मई 2026

पश्चिम बंगाल से बड़ी ख़बर आ रही है कि चुनावी नतीजों के महानायक शिवेंदु अधिकारी के पीए को सरेआम गोलियों से भून दिया गया है जिससे उनकी स्पाट पर ही मौत हो जाने की ख़बर है।

सत्ता परिवर्तन की लहर और चुनावी नतीजों के बाद हिंसा का दौर पश्चिम बंगाल में थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में बीजेपी नेता और राज्य के नए राजनैतिक धुरी बने सुवेंदु अधिकारी के करीबी निजी सहायक (पीए) चंद्र नाथ रथ की मध्यमग्राम में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई है।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार वह कुछ लोगों के साथ मौजूद थे, तभी हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है और राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

वारदात को दिया सरेआम अंजाम

बताया जा रहा है कि सुभेंदु चंद्र नाथ रथ को मध्यमग्राम में तब निशाना बनाया गया जब वे कुछ लोगों के साथ सार्वजनिक स्थान पर थे.

मौके पर ही मौत: हमलावरों ने बेहद करीब से गोलियां चलाईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृतक लंबे समय से सुवेंदु अधिकारी के साथ जुड़े हुए थे और उनके बेहद विश्वसनीय माने जाते थे।

बता दें कि बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों (4 मई) के बाद से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों से तोड़फोड़ और झड़पों की खबरें आ रही हैं।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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