क्राइम रिपोर्ट

मां ने मोबाइल देने से किया इन्कार, तो घर छोड़ बालिका निकल गई बाहर…

घर-घर की कहानी में मोबाइल बना विलेन...

मां ने मोबाइल देने से किया इन्कार, तो घर छोड़ बालिका निकल गई बाहर…
मामला सीहोर जिले के भैरुंदा का

सीहोर, 11 मार्च 2026
एमपी मीडिया पॉइंट

“थाना भैरुंदा पुलिस ने 04 घंटे के अंदर नाबालिक बालिका को किया दस्तयाब”

पूरी ख़बर विस्तार से..
10 मार्च 2026 को फरियादी ने सूचना थाना भैरुंदा मे दिया कि उसकी नाबालिक लड़की उम्र 17 वर्ष को कोई अज्ञात व्यक्ति बहला फुसलाकर ले गया है। जिसकी रिपोर्ट पर प्रकरण कायम कर बालिका के खोजबीन को लेकर एसडीओपी रोशन कुमार जैन के मार्गदर्शन में पुलिस टीम गठित की गई।

अपहर्ता की दस्तयाबी सबंधी टीम ने उप निरीक्षक पूजा सिहं राजपूत के नेतृत्व में रात्रि में ही तत्काल संपूर्ण भेरूंदा क्षेत्र में गश्त कर बस स्टैंड व संभावित क्षेत्रों में तलाशी की गई | रात्रि गश्त दौरान गश्त अधिकारी प्रधान आरक्षक लोकेश रघुवंशी द्वारा नाबालिक बालिका को सुहानी पैलेस, सीहोर रोड भैरुन्दा से विधिवत दस्तयाब किया गया |

खास बात यह कि उक्त बालिका व परिजन से पूछताछ के दौरान ये तथ्य सामने आया कि बालिका के मां द्वारा बालिका से मोबाइल फ़ोन अधिक उपयोग न करने व मोबाइल बालिका से ले लेने पर बालिका गुस्से में घर छोड़कर चली गई | नाबालिक बालिका को 04 घंटे के अंदर ही भैरुन्दा पुलिस टीम द्वारा सकुशल विधिवत दस्तयाब कर उसके परिजनो के सुपुर्द किया गया। साथ ही महिला उपनिरीक्षक पूजा राजपूत द्वारा नाबालिक बालिका की काउंसलिंग की गई व आइंदा इस तरह से घर न छोड़ने की समझाइश दी गई |

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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