सीहोर : टीम ‘संडे का सुकून’ की सराहनीयता के नाबाद 500 दिन…
सीना तान कर जहां सीहोर को मिलता सुकूं..

विशेष
- सीहोर : टीम ‘संडे का सुकून’ की सराहनीयता के नाबाद 500 दिन…
जीरो-वेस्ट पॉलिसी साथ के जिला चिकित्सालय सीहोर में पूर्ण किए 500 दिन निशुल्क निरंतर भोजन समाजसेवा की मिसाल।
जयंत शाह, सीहोर
नर सेवा ही नारायण सेवा है, इस सोच को सच कर दिखाया शहर के प्रबुद्ध युवाओं की टोली ‘टीम संडे के सुकून’ ने। जिला चिकित्सालय में इलाज कराने आने वाले मरीजों के परिजनों की भोजन की जरूरत को देख शुरू हुआ सेवा का यह कार्य आज एक नए मुकाम पर पहुंच गया है। टीम ने अस्पताल परिसर में पिछले 500 दिनों से बिना किसी रुकावट के निरंतर नि:शुल्क ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का पुण्य कार्य कर रही है।
इस पावन अभियान के तहत अब तक करीब 75 हजार से अधिक भोजन की थालियां जरूरतमंदों को परोसी जा चुकी हैं। इस पूरे अभियान की सबसे अनूठी और रोचक बात यह है कि पिछले 500 दिनों में इतनी बड़ी संख्या में भोजन वितरण के बावजूद एक भी दिन सिंगल-यूज प्लास्टिक या डिस्पोजल बर्तनों का उपयोग नहीं किया गया। टीम ने पूरी तरह से ‘जीरो-वेस्ट’ (शून्य कचरा) की पॉलिसी को अपनाकर हर दिन स्टील की थालियों में भोजन परोसा। यह प्रयास न केवल पर्यावरण को कचरे से बचा रहा है, बल्कि समाज को स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण का एक बेहद सकारात्मक संदेश भी दे रहा है।
इस टीम में डॉक्टर, इंजीनियर, और युवा व्यवसायी सहित अनेक समाजसेवी शामिल हैं, जिनकी हर सुबह की शुरुआत बिस्तर छोडऩे के साथ ही सेवा कार्यों से होती है। रविवार के दिन जब लोग अपने निजी जीवन में व्यस्त होते हैं, तब यह टीम पूरी ऊर्जा के साथ शहर हित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद में जुट जाती है।
जन्मदिन और पुण्यतिथि मनाने का बदला ट्रेंड
टीम संडे के सुकून ने शहरवासियों की सोच और उत्सव मनाने के तौर-तरीकों को भी बदला है। अब शहर के लोग अपने परिजनों के जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ या अपनों की पुण्यतिथि होटलों में उड़ाने के बजाय सेवा कार्य कर मनाते हैं।
टीम ऐसे लोगों को एक बेहद सरल, पारदर्शी और अनुशासित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है, जिससे लोग सीधे अस्पताल में परिजनों को भोजन कराकर अपने विशेष दिनों को यादगार बना रहे हैं।
गौ-सेवा, मोक्ष वाहन और बर्तन बैंक
जिला अस्पताल में निशुल्क भोजन के अलावा इस तपती दोपहरी और भीषण गर्मी में टीम ने बेजुबान पशुओं के लिए भी मोर्चा संभाला है। अपने गौभोजनम कार्यक्रम के अंतर्गत टीम द्वारा शहर के हर हिस्से में भोजन और जल कुंड रखे गए हैं। प्रतिदिन ‘गौ सेवा वाहन’ के माध्यम से गोग्रास (चारा-पानी) भरकर शहर के सैकड़ों गोवंश के कंठ और पेट की भूख मिटाई जा रही है।
इसके साथ ही समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए टीम द्वारा मोक्ष वाहन संचालित किया जाता है, जो शोकाकुल परिवारों की सुविधा के लिए पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध रहता है। वहीं शहर में डिस्पोजल के उपयोग को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से टीम ने ‘बर्तन बैंक’ की भी स्थापना की है, जिससे शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों में लोग डिस्पोजल छोड़ स्टील के बर्तनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। युवाओं की यह टोली आज सीहोर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति के सही सदुपयोग की एक मिसाल बन चुकी है।
संपादक की कलम से…
कोई भी शुभ कार्य उसकी निरंतरता के बाद ही परिपक्व हो पता है। टीम (समूह) द्वारा किया गया कोई भी कार्य निरंतरता एवं अपने उद्देश्य को तब ही प्राप्त कर सकता है जब उस टीम में कार्य करने वाला प्रत्येक सदस्य उस शुभ उद्देश्य के प्रति समर्पित रहे।
निजी महत्वाकांक्षा , मान-सम्मान की चाहा से ऊपर उठकर शुभ संकल्पों में समझदारी से संलग्न रहे। अन्यथा कार्यक्रम अपने उद्देश्यों से भटक जाता है।
निजी जीवन में भी हम जब भी कोई साधना करते हैं तो उसका फल तुरंत ही नहीं मिलता।
लंबे समय तक नियम और संयम के साथ प्रलोभन से बचते हुए प्रयासरत रहने पर ही साधना फलीभूत होती है।
टीम संडे के सुकून द्वारा जिला चिकित्सालय में मरिज एवं उनके परिजनों को भोजन उपलब्ध कराने का पुण्यशाली कार्य जिस प्रकार से संचालित किया जा रहा है अब पूरे शहर के लोग उस प्रयास को विश्वास के साथ देख रहे हैं। और धीरे-धीरे शहर के प्रत्येक वर्ग के नागरिकों का जुड़ाव भी टीम संडे के सुकून द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों के प्रति होने लगा है।
– जयंत शाह, संपादक



