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गायकी की दुनिया के एक ओर स्वर्णिम युग का अवसान , आशा भोसले का निधन…

मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में ली अंतिम सांस

गायकी की दुनिया के एक ओर स्वर्णिम युग का अवसान , आशा भोसले का निधन…

हजारों गीतों की मलिका आशा भोसले को कल 11 अप्रैल को घातक बीमारी के कारण ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था जहां आज उनका निधन हो गया।

मुंबई, 12 अप्रैल 2025
एमपी मीडिया पॉइंट

भारत की सुप्रसिद्ध गायिका, स्वरों की मलिका आशा भोसले क@ आज 12 अप्रैल को निधन हो गया है। उन्हें असाधारण तकलीफ के कारण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां से वह वापस लौटने में असफल रहीं। आशा जी के निधन से संगीत जगत में निराशा का माहौल क्रिएट हो गया है। आधिकारिक जानकारी अनुसार आशा जी का निधन सीवियर हार्ट अटैक के कारण हुआ। कल जैसे ही उनके अस्वस्थ होने का समाचार शाया हुआ तभी से सभी लोग आशा भोसले की सलामती के लिए दुआ मांग रहे थे।

बता दें कि आशा भोसले आवाज़ की दुनिया का वह नाम है जिसे पिछले 7 दशकों से आदर के साथ जाना जाता है और आगे भी लिया जाता रहेगा। उन्होंने अपना पहला गाना वर्ष 1948 में फिल्म चुनरिया के लिए गाया था। तब से लेकर अभी तक अपने केरियर में करीब 15-16 हजार गीत गा चुकी हैं। हिंदी के अलावा मराठी, तमिल,बंगाली,मलियालम,भोजपुरी,अंग्रेज़ी, गुजराती, रुसी भाषा में भी आशा जी अपने गीतों की आवाज जादू बिखेर चुकी हैं। आशा जी के जाने से जो पद रिक्त हुआ है उसकी भरपाई तो अब बेहद ही मुश्किल नज़र आ रही है।
हमारे सभी पाठकों की ओर से आशा जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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