मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश भाजपा में बढ़ती अंतर्कलह पर प्रदेश अध्‍यक्ष और संगठन महामंत्री की परीक्षा- विजया पाठक

लेख

मध्यप्रदेश भाजपा में बढ़ती अंतर्कलह

सत्ता और संगठन की आपसी खींचतान बनी चुनौती

मध्यप्रदेश भाजपा में बढ़ती अंतर्कलह पर प्रदेश अध्‍यक्ष और संगठन महामंत्री की परीक्षा

कई मंत्रियों के ओएसडी की कार्यप्रणाली से कटघरे में…

विजया पाठक, भोपाल
एडिटर, जगत विजन

मध्यप्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के भीतर सियासी अंतर्कलह सतह पर आती दिखाई दे रही है। सत्ता में लंबे समय से काबिज भाजपा में अब नेतृत्व, प्रभाव और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर भीतर ही भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। प्रदेश के अलग–अलग क्षेत्रों में नेताओं के बीच बढ़ते गुट, परस्पर अविश्वास और संगठनात्मक संतुलन बिगड़ने की आशंकाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की बेचैनी बढ़ गई है। भाजपा के भीतर बढ़ती खींचतान का असर अब मंत्रियों के कार्यालयों तक भी पहुंचता दिख रहा है। अब संगठन के पास मोहन सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और उनके ओएसडी की रिपोर्ट पहुंची है, जो दर्शाती है कि इनकी कार्यप्रणाली ठीक नहीं है। साथ ही इन पर भ्रष्‍टाचार और अनियमितताएं किये जाने के आरोप हैं। जगत विजन ने अनेकों बार प्रदेश के भ्रष्‍ट मंत्रियों के कारनामों को उजागर किया था और सरकार को भी सचेत किया कि इनकी कार्यप्रणाली से पार्टी और सरकार की छबि खराब हो रही है। पार्टी और सरकार के गलियारों में यह माना जा रहा है कि ओएसडी के माध्यम से ही कई मंत्री अपने–अपने राजनीतिक एजेंडे और गुटीय संतुलन साधने की कोशिश करते हैं। चर्चा है कि विश्वास सारंग, जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल सहित कई अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के ओएसडी में जल्द बदलाव हो सकता है। कैलाश विजयवर्गीय भी सरकार में वरिष्‍ठ मंत्री हैं। लेकिन उन पर आज तक ऐसी कोई आंच नहीं आयी है। क्‍योंकि उन्‍हें पार्टी की मर्यादा और अनुशासन का पता है। उनकी कार्यप्रणाली से सत्‍ता या संगठन को नीचा नही देखना पड़ा है। आज इन बेलगाम मंत्रियों को विजयवर्गीय जैसे वरिष्‍ठ मंत्रियों से सीख लेने की जरूरत है। संगठन के इशारे पर होने वाले ये संभावित परिवर्तन केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी माने जा रहे हैं। सागर, जबलपुर और विंध्य जैसे प्रमुख राजनीतिक क्षेत्रों से आ रही खबरें संगठन के लिए चेतावनी की घंटी मानी जा रही हैं।

सागर में तीन दिग्गजों के बीच बढ़ता तनाव

सागर संभाग में भाजपा की अंदरूनी राजनीति सबसे अधिक चर्चा में है। यहां वरिष्ठ नेता और लंबे समय से गोपाल भार्गव, गोविंद सिंह राजपूत और भूपेंद्र सिंह के बीच बढ़ते तनाव ने संगठन की चिंता बढ़ा दी है। तीनों नेताओं की अपनी–अपनी राजनीतिक, समर्थक वर्ग और प्रशासनिक पहुंच है। ऐसे में क्षेत्रीय निर्णयों, नियुक्तियों और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर उनके बीच तालमेल की कमी खुलकर सामने आने लगी है।

जबलपुर में नेताओं के करीबी आमने–सामने

जबलपुर संभाग में भी पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, मंत्री राकेश सिंह और विधायक अभिलाष पांडे के करीबी नेताओं के बीच खींचतान तेज हो गई है। प्रत्यक्ष टकराव भले ही शीर्ष नेतृत्व के बीच न हो, लेकिन उनके समर्थक और निचले स्तर के नेता लगातार एक–दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आ रहे हैं। संगठनात्मक फैसलों, नगर और जिला स्तर की भूमिका को लेकर असंतुलन की स्थिति बन रही है। पार्टी के कार्यक्रमों में मंच साझा करने से लेकर स्थानीय मुद्दों पर अलग–अलग सुर में बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि भीतरखाने खाई गहरी हो रही है।

विंध्य क्षेत्र में भी उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, विधायक अभय मिश्रा और वरिष्ठ नेता जनार्दन मिश्रा के बीच बढ़ती राजनीतिक असहजता की चर्चा सियासी गलियारों में है। क्षेत्रीय प्रभाव, संगठन पर पकड़ और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर मतभेद उभर रहे हैं। हालांकि सार्वजनिक मंचों पर सभी नेता एकजुटता का संदेश देते नजर आते हैं, लेकिन अंदरूनी स्तर पर समर्थकों के बीच प्रतिस्पर्धा और असंतोष संगठनात्मक समन्वय को प्रभावित कर रहा है।

संगठन की भूमिका और बढ़ती चुनौती

प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कैसे इस बढ़ती अंतर्कलह को समय रहते नियंत्रित किया जाए। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हमेशा यह संदेश देता रहा है कि संगठन सरकार से बड़ा होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि हालिया बदलावों और संभावित फेरबदल के जरिए संगठन यह दिखाना चाहता है कि अनुशासन सर्वोपरि है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल ओएसडी बदलने या कुछ प्रशासनिक फैसलों से गहरे राजनीतिक मतभेद खत्म हो पाएंगे?

कार्यकर्ताओं में भी बढ़ रहा असमंजस

नेताओं के बीच बढ़ती खींचतान का सीधा असर कार्यकर्ताओं पर भी पड़ रहा है। अलग–अलग गुटों में बंटे कार्यकर्ता यह समझ नहीं पा रहे कि किसके साथ खड़ा होना संगठनात्मक दृष्टि से सुरक्षित रहेगा। इससे जमीनी स्तर पर सक्रियता और समन्वय प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। भाजपा की ताकत हमेशा उसका कैडर आधारित ढांचा रहा है। लेकिन जब ऊपर के स्तर पर खींचतान बढ़ती है, तो उसका असर नीचे तक जाता है। यही वजह है कि संगठन नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर मंथन में जुटा है। अब देखने वाली बात यह है कि संगठन के इशारे पर होने वाले इन परिवर्तनों से वास्तव में क्या बदलाव देखने को मिलता है। क्या गुटीय राजनीति पर लगाम लगेगी या यह केवल अस्थायी संतुलन साबित होगा? क्या शीर्ष नेतृत्व सख्त संदेश देकर सभी नेताओं को एकजुट करने में सफल होगा? मध्यप्रदेश भाजपा के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सत्ता में रहते हुए संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की है। यदि समय रहते इस बढ़ती अंतर्कलह को नहीं संभाला गया, तो यह न केवल संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर डाल सकती है। फिलहाल सियासी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा नेतृत्व इस अंदरूनी चुनौती से कैसे निपटता है और क्या पार्टी अपनी पारंपरिक एकजुटता को फिर से स्थापित कर पाती है या नहीं?

राजेश शर्मा

राजेश शर्मा मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के हिंदी दैनिक अख़बारों- दैनिक भास्कर नवभारत, नईदुनिया,दैनिक जागरण,पत्रिका,मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग, दिनमान के पत्रकार रहे, करीब पांच शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी बतौर रिपोर्टर के हाथ आजमाए। वर्तमान मे 'एमपी मीडिया पॉइंट' वेब मीडिया एवं यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक पद पर कार्यरत हैं। आप इतिहासकार भी है। श्री शर्मा द्वारा लिखित "पूर्वकालिक इछावर की परिक्रमा" इतिहास एवं शोध पर आधारित है। जो सीहोर जिले के संदर्भ में प्रकाशित पहली एवं बेहद लोकप्रिय एकमात्र पुस्तक में शुमार हैं। बीएससी(गणित) एवं एमए(राजनीति शास्त्र) मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आध्यात्म की ओर रुख किए हुए है। उनके त्वरित टिप्पणियों,समसामयिक लेखों,व्यंगों एवं सम्पादकीय को काफी सराहा जाता है। सामाजिक विसंगतियों, राजनीति में धर्म का प्रवेश,वंशवाद की राजसी राजनिति जैसे स्तम्भों को पाठक काफी दिलचस्पी से पढतें है। जबकि राजेश शर्मा खुद अपने परिचय में लिखते हैं कि "मै एक सतत् विद्यार्थी हूं" और अभी तो हम चलना सीख रहे है..... शैलेश तिवारी

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