राजा भोज केवल एक पराक्रमी राजा ही नहीं बल्कि ज्ञान, संस्कृति, न्याय और सुशासन के प्रतीक थे – राजस्व मंत्री श्री वर्मा
उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार भी पहुंचे सीहोर..

राजा भोज केवल एक पराक्रमी राजा ही नहीं बल्कि ज्ञान, संस्कृति, न्याय और सुशासन के प्रतीक थे – राजस्व मंत्री श्री वर्मा
राजस्व मंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री ने सीहोर में किया राजा भोज की प्रतिमा का अनावरण
राजा भोज केवल आध्यात्मिक चेतना के केंद्र नही थे, बल्कि टेक्नोलॉजी निर्माण के क्षेत्र में भी उनका बड़ा योगदान है – उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार
सीहोर, 22 फरवरी 2026
एमपी मीडिया पॉइंट
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा तथा उच्च शिक्षा तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार ने सीहोर में परमार समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में चक्रवर्ती सम्राट राजा भोज की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम में जन प्रतिनिधि,गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि चक्रवर्ती सम्राट राजा भोज केवल एक पराक्रमी राजा ही नहीं बल्कि ज्ञान, संस्कृति, न्याय और सुशासन के प्रतीक थे। उन्होंने अपने शासनकाल में शिक्षा, साहित्य, जल प्रबंधन, वास्तुकला तथा लोककल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए। राजा भोज ने समाज को यह संदेश दिया कि सशक्त शासन वही होता है जो जनता के हित, ज्ञान के विस्तार और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित हो। उन्होंने कहा कि आज भी राजा भोज की कार्यशैली प्रशासन और जनसेवा के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रदेश सरकार उनके आदर्शों पर चलते हुए विकास, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि सम्राट राजा भोज भारतीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने शिक्षा और ज्ञान को शासन की आधारशिला बनाया। उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना कर विद्वत्ता की नई परंपरा स्थापित की तथा गुरुकुल और शिक्षण संस्थानों को संरक्षण देकर ज्ञान की धारा को आगे बढ़ाया। उनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथो में युक्तिकल्पतरू और संमृांगढ़सूत्रधार प्रमुख हैं। राजा भोज केवल आध्यात्मिक चेतना के केंद्र नही थे, बल्कि टेक्नोलॉजी निर्माण के क्षेत्र में भी उनका बड़ा योगदान है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को राजा भोज के ज्ञान, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज और राष्ट्र के विकास का सबसे बड़ा माध्यम है और राजा भोज की विचारधारा आज भी नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर और संस्कारित भारत निर्माण की दिशा दिखाती है।



