
कांग्रेस नेताओं की चाणक्य नीति से हुआ था कमलनाथ सरकार का पतन
स्वाभिमान, दूरदर्शिता और लोकतांत्रिक नेतृत्व का प्रतीक है कमलनाथ का 15 माह का कार्यकाल
कमलनाथ स्वाभिमान के सामने राजनीतिक चालाकी से हार गये थे मुख्यमंत्री की कुर्सी
राज्यसभा सीट के प्रत्याशी चयन में हाईकमान को बरतनी होगी सतर्कता
कमलनाथ की दूरदर्शिता को आगे बढ़ा रहे मोहन यादव

विजया पाठक, भोपाल. एडिटर, जगत विजन
मध्यप्रदेश की राजनीति हमेशा ही उतार-चढ़ाव और रणनीति का जीवंत उदाहरण रही है। यहाँ पर सत्ता की राजनीति में न केवल शक्ति संघर्ष होता है, बल्कि नेताओं की दूरदर्शिता, रणनीतिक सोच और व्यक्तिगत स्वाभिमान भी परखा जाता है। ऐसे ही एक दृष्टांत के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम हमेशा याद रखा जाएगा। उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल और नेतृत्व ने यह साबित किया कि राजनीति में केवल सत्ता का अधिकार ही नहीं, बल्कि मूल्य, स्वाभिमान और लोकतंत्र के प्रति निष्ठा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कमलनाथ का मुख्यमंत्री बनना और उनके द्वारा सरकार का संचालन करना एक ऐसे दौर में हुआ जब प्रदेश में जनता की अपेक्षाएं और राजनीतिक परिस्थितियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं। कमलनाथ ने पार्टी के हित और जनता की सेवा को हमेशा सर्वोपरि रखा। उनके कार्यकाल के 15 महीनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि नेता केवल पद और सत्ता की लालसा में नहीं, बल्कि जनता की भलाई और न्यायप्रिय प्रशासन में भी निष्ठावान हो सकता है। कमलनाथ की सबसे बड़ी विशेषता उनकी दूरदर्शिता और राजनीतिक विवेकशीलता रही है। मध्यप्रदेश की राजनीति में अक्सर सत्ता परिवर्तन और दल-बदल जैसी घटनाएँ देखने को मिलती रही हैं। ऐसे माहौल में कई नेता केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने राजनीतिक कदम उठाते हैं, लेकिन कमलनाथ ने हमेशा पार्टी लाइन और अपने सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। उन्होंने यह साबित किया कि यदि कोई नेता अपने स्वाभिमान और नैतिक मूल्यों से समझौता करता है, तो वह सिर्फ अस्थायी लाभ पा सकता है, लेकिन दीर्घकालीन दृष्टिकोण और सम्मान खो देता है।
कमलनाथ की दीर्घकालिक सोच को आगे बढ़ा रहे मुख्यमंत्री डॉ. यादव
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व की सबसे बड़ी मिसाल उनके 15 महीने के कार्यकाल का वह समय है, जब उन्होंने बिना किसी व्यक्तिगत लालच के राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया। उनके शासनकाल में अफसरशाही और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया गया। कमलनाथ ने अपने अफसरों और मंत्रियों के साथ मिलकर ऐसे रणनीतिक उपाय तैयार किए, जो प्रदेश के विकास और प्रशासनिक सुधार में सहायक थे। यह रणनीति इतनी सुदृढ़ और दूरगामी थी कि आज भी मुख्यमंत्री उनकी तैयारियों को अमलीजामा पहनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह दिखाता है कि कमलनाथ केवल वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके विचार और नीति भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक हैं।
मध्यप्रदेश के लिए अहम है राज्यसभा सीट
जून 2026 को मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो रही हैं। राज्य में राज्यसभा के तीन सदस्यों के पद रिक्त हो रहे हैं। प्रदेश से कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है। ऐसे में मध्यप्रदेश कांग्रेस से प्रत्याशी के लिए सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी हाईकमान को चयन में सतर्कता बरतने की जरूरत है क्योंकि इस समय प्रदेश कांग्रेस बुरे वक्त से गुजर रही है। प्रत्यासी के चयन में हाईकमान को 2028 की रणनीति को भी देखना होगा। बेहतर होगा कि पार्टी किसी अनुभवी और कुशल नेतृत्वकर्ता को इस पद पर आसीन कराये।
चाणक्य नीति और कमलनाथ सरकार का पतन
मध्यप्रदेश की राजनीति में 2018-19 के दौर में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने केवल 15 महीने ही शासन किया। इसका एक प्रमुख कारण था कांग्रेस के भीतर की गुप्त राजनीतिक रणनीतियां, जिन्हें पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को चाणक्य नीति के रूप में देखा जाता है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, कमलनाथ के खिलाफ कई पूर्व मंत्री और विधायक भाजपा से संपर्क में थे। इस समय का लाभ उठाकर कांग्रेस के नेताओं ने गुप्त रूप से दल के भीतर असंतोष और सत्ता संघर्ष को हवा दी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कमलनाथ को अपने स्वाभिमान और पार्टी लाइन के बीच कठिन निर्णय लेना पड़े। यह घटना साबित करती है कि राजनीति केवल सत्ता तक सीमित नहीं है यह रणनीति, समझदारी और दूरदर्शिता का खेल भी है। कांग्रेस नेताओं की चाणक्य नीति ने कमलनाथ सरकार के कमजोर पड़ते पक्ष और भीतर के मतभेदों का कुशलतापूर्वक लाभ उठाया।
भाजपा नेताओं में शुरू हुई अंतर्कलह
मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं और विधायकों के बीच वर्तमान में चल रही आंतरिक कलह को देखते हुए यह समझना आवश्यक है कि कमलनाथ की शैली और उनके नेतृत्व की गहराई कितनी प्रशंसनीय थी। जहाँ अन्य नेता केवल व्यक्तिगत लाभ और सत्ता के लिए संघर्ष करते हैं, वहीँ कमलनाथ ने अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान को सर्वोपरि रखा। उनके नेतृत्व में न केवल प्रशासनिक सुधार हुए, बल्कि उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिक नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। कमलनाथ के प्रति कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान और उनकी नीति के प्रति विश्वास यह दर्शाता है कि उनके योगदान को केवल तत्कालीन दौर में नहीं बल्कि दीर्घकालीन रूप से भी महत्व दिया जाता है। कमलनाथ का नेतृत्व केवल एक राजनीतिक पद तक सीमित नहीं था यह नेतृत्व विचार, नीति और आदर्श का प्रतीक था। उनके कार्यकाल में किए गए प्रयास और उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता आज भी प्रदेश की राजनीति में मार्गदर्शक बनी हुई है।
स्वाभिमान और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता
कमलनाथ की एक और महत्वपूर्ण विशेषता उनका अदम्य स्वाभिमान है। जब राजनीतिक परिस्थितियाँ उनके पक्ष में नहीं थीं और सत्ता की कुर्सी बनाए रखना कठिन हो गया, तब उन्होंने अपने स्वाभिमान और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देते हुए इस्तीफा देना उचित समझा। यह कदम केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक आदर्श नेतृत्व के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रशंसनीय था। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि एक सच्चा नेता केवल पद के लालच में नहीं बल्कि समाज और पार्टी के हित में निर्णय लेता है। इस निर्णय ने उन्हें मध्यप्रदेश की राजनीति में एक स्थायी और आदर्श नेता के रूप में स्थापित किया। कमलनाथ का एक अन्य पहलू उनकी रणनीतिक कुशलता है। उनके कार्यकाल के दौरान और उसके बाद की परिस्थितियों ने यह दिखाया कि कमलनाथ न केवल तत्कालीन परिस्थितियों को समझते हैं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का भी सटीक विश्लेषण करते हैं।



